दिल्ली में सूर्योदय | ज्ञान के सूर्य शिवबाबा के लिए |

दुनिया के सब लोगों के प्रति शिवबाबा का सन्देश और ज्ञान |

राजा योग

राजा योग अर्थात योग जिससे राजा बनते हैं |  अनेक जन्मों से गुजरने के बाद मनुष्य आत्माएं देहभान और शारीरिक योग में फंस गयी हैं |  फिर भी  शारीरिक कसरत, व्रत, पूजा, अंधे विश्वास के द्वारा अखंड सुख शान्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती |  सच्चा सुख शांति प्राप्त करने के लिए अर्थात जीवन मुक्ति के स्टेज तक पहुँचने के लिए सच्चे ‘स्व’ को जानने की आवश्यकता है | इसका मतलब है कि आत्मा अभिमानी बनना है | अपने को आत्मा के रूप में देखना है जो राजा की तरह अपने शरीर का नियंत्रण करती है न कि गुलामजैसे उसकी सेवा करती है |

परमपिता शिव उस स्टेज को प्राप्त करने के लिए मनुष्य आत्माओं को सच्चा राजा योग अर्थात भगवान की याद का सहज अभ्यास सिखाते हैं | याद सहज स्वभाविक और निरंतर हो सकती है जब कि मनुष्य के द्वारा सिखाये योग में मेहनत लगता है | परमपिता शिव शरीर में रहते हुए भी सदेव निराकारी स्टेज में हैं | मतलब उनका भान देह से परे है | इसिलए वे हर प्रकार केप्रभाव से परे हैं | जब हम यह अनुभव करें कि हम अविनाशी आत्माएं हैं न कि ५ तत्त्वों से बने हुए शरीर, तब हम निराकारी स्टेज को पकड़ेंगे और अखंड सुख शांति में रहेंगे |

परमपिता परमात्मा शिव ही राजा योग सिखाने के अधिकारी हैं |  ‘राजा योग’ सिखाने का और किसीका अधिकार नहीं | कोई मनुष्य यह नहीं कह सकता कि मैं दूसरों को राजा योग सिखाउंगा | मनुष्य के गुरुओं का राजा योग के कोर्स  कराना शिवबाबा की श्रीमत का उल्लंघन है |

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