दिल्ली में सूर्योदय | ज्ञान के सूर्य शिवबाबा के लिए |

दुनिया के सब लोगों के प्रति शिवबाबा का सन्देश और ज्ञान |

नयी दुनिया के लिए नया ज्ञान

शिव बाप आकर नया ज्ञान सुनाते हैं | नया ज्ञान हो तब ही नयी दुनिया स्थापित हो सकती | अगर मनुष्य पुराने शास्त्रों के बारे में बातें करते रहें तो दुनिया पुरानी होती रहेगी | पुरानी दुनिया में रहनेवाले  मनुष्य नयी दुनिया के लिए नया ज्ञान सूना नहीं सकते | सब को आकर बाप को पहेचानना है | वे ही नयी दुनिया का संगठन बनानेवाले हैं |

बैसिक ज्ञान
आत्मा, परमात्मा, सृष्टि आदि के बारे में ज्ञान जो बड़ी माँ के पार्ट को बजनेनावाले परमपिता शिव मुर्लियों के रूप में १९४७-१९६९ तक  ब्रह्मा बाबा (दादा लेखराज ) सूना रहे थे  |

अड्वैन्स ज्ञान

यह ईस्वरिया ज्ञान का गहरा अर्थ है जो १९७६ से प्रजापिता (सब मनुष्यों का पिता) के तन के द्वारा बाप शिक्षक सदगुरु का पार्ट बजाते हुए शिव बाप सूना रहे हैं | इस ज्ञान को पढ़ती हुई मनुष्य आत्मा समझ सकती है कि सृष्टि के माता-पिता कौन हैं, ब्रह्मा शंकर विष्णु के पार्ट कौन और किस के द्वारा बजाते हैं आदि | चक्र में अपने सब जन्मों को भी जन सकती है |

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